ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से उनके फैसले और उनके मंत्रालयों के काम करने के तरीके विश्व राजनीती के लिए बड़े हलचलों का केंद्र बना हुआ है। उनके लिए फैसलों ने एक प्रकार से वैश्विक अर्थव्यवश्था को ट्रेड वॉर की तरफ मोड़ दिया है, और स्पष्ट कर दिया है की ग्रेट अमेरिका बनाने के लिए वे किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।
डोनाल्ड ट्रम्प और टैरिफ वॉर :- हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा टैरिफ लगाए जाने के फैसले के कारण दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गई,अमेरिका के खुद के स्टॉक मार्केट इंडेक्स में 5 से 6% की गिरावट दर्ज की गई। ट्रंप ने अपने रिसिप्रोकल टैरिफ के घोषणा पत्र में उन सभी देशों पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। जिन देशों ने अमेरिकी सामान के ऊपर अधिकतम टैक्स वसूल करते हैं, जिसमें से भारत भी एक हैं आपको बता दें कि यह भारत के लिए एक चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि व्यापारिक दृष्टिकोण से भारत अमेरिका के साथ व्यापार करने में ट्रेड सरल प्लस का व्यवसाय करता है अर्थात अमेरिकी समान काम आयात करना और उसके एवज में अपने देश में बनी हुई वस्तुओं को अमेरिका में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में निर्यात करना। इसमें भारतीय सूची में फार्मास्यूटिकल आईटी सर्विसेज प्रमुख है
अमेरिका की रिसिप्रोकल टैरिफ की लिस्ट से यूरोपीय यूनियन भी नहीं बच रहा, ट्रंप के टैरिफ की घोषणा यूरोपीय यूनियन के ऊपर करने के बाद यूरोपीय यूनियन ने भी अमेरिका की सामानों पर 25% की टैक्स वृद्धि का घोषणा कर दिया जिससे अमेरिकी में भी इन्फ्लेशन का खतरा लगातार बढ़ते जा रहा है।
इसी कड़ी में जहाँ एक अराफ़ तकरार दिख रही है, वही दूसरी और टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका और यूरोपीय यूनियन आपस में एक संधि पर वार्तालाप कर रहे हैं जिसमें एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के बीच में साइन किया जाएगा जिसमें दोनों अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के देश आपस में 0% पर ट्रेड कर सकते हैं।
अमेरिका के रिसिप्रोकल टैरिफ लगाने के बाद दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गई लेकिन हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा एक और घोषणा की गई जिसमें जिन देशों के ऊपर टैरिफ लगाया जा रहा है उन्हें 90 दिनों का एक छूट दिया जा रहा है क्योंकि उन देशों ने अमेरिका के टैरिफ प्लान के अगेंस्ट कोई भी एक्शन नहीं लिया और लगातार अमेरिकी अथॉरिटी से बात करने की कोशिश की की किस तरह से टैरिफ को काम किया जाए 90 दिनों की टैरिफ में कटौती अमेरिका तरफ से देना उन देशों के लिए वरदान से काम नहीं था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ट्वीट बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने लिखा कि यह सही समय है स्टॉक मार्केट में बाय करने का उनके यह स्टेटमेंट के बाद स्टॉक मार्केट में भयंकर तेजी दर्ज की गई अमेरिकी इंडेक्स नैस्डेक और डाउ जॉन्स अपर सर्किट में बंद हुए और इसी बीच एक रिपोर्ट का भी खुलासा हुआ जिसमें कुछ उच्च स्तर के अधिकारियों ने यह आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप शॉर्ट सेलिंग कर रहे हैं, ट्रम्प पर यह आरोप भी लग रहे है की वे गलत रारिको के बयान – बजी कर के स्टॉक मार्किट मेगड़बड़ि क्र रहे है और व्हाइट हॉर्स की टीम से कुछ नंबर ने इस शॉर्ट सेलिंग से करोड़ों रुपए बना लिए जिससे एक इंक्वारी कमिटी की गठन की चर्चा हो रही है जो इस सारे प्रकरण की जांच करेगी।
ट्रेड वॉर vs ग्रेट अमेरिका
डॉनल्ड ट्रम्प ने अपने चुनावी भाषणों में भी इस बात का जिक्र किया था कि अमेरिका गलत नेताओ के हाथो में रह कर एक कमजोर देश बन चूका है, वे अमेरिका को एक बार फिर से ग्रेट अमेरिका बनायेंगे। और अमेरिका को ग्रेट अमेरिका बनाने के लिए उन्हें जो करना पड़े वो करेंगे।
पर यहाँ पर उनके लिए फैसलो का विरोध काफी तेज़ी से उनके अपने ही देश में देखने को मिल रहा है।
फिर चाहे आम जनता हो या विपक्ष के नेता या देश के दूरदर्शी विश्लेषक, ये सभी इस वक्त अमेरिका में दो गुटों में बाटे हुए दिखाई दे रहे है, एक बड़ा तबका है जो ट्रम्प के नीतियों का विरोध कर रहा है।
फिर चाहे उनके द्वारा बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारियों को बर्खास्त करना हो या प्री रिटायरमेंट कर्मचारियों पर जोर देना हो। अमेरिका में लोग अब अपने नौकरियों के जाने , अचानक आने वाली महंगाई और निवेश में बड़े नुकशान से डरे हुए है।
ऐसे में सवाल यह भी उठता है की कि क्या अमेरिका सैक में ग्रेट अमेरिका बनने की तरफ बढ़ रहा है या खुद के बनाये जाल में फसने वाला है।
ट्रम्प VS वैश्विक अर्थव्यवस्था
डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही कुछ मित्र देशो के वामपंथी सरकारे और विश्लेषकों का मुँह बन गया था। और अब उनके टैरिफ बढ़ाने और विदेशी उत्पादन कर्ताओ पर अमेरिका में अतिरिक्त टैक्स लगाने की नीति के चलते मित्र देश भी उनसे काफी नज़ारा नज़र आ रहे है।
शून्य मानव कॉलोनी वाला महाद्वीप अंटार्कटिका से ले कर अपने मित्रो तक सभी पर कुछ न कुछ टैक्स, टैफिर, या पाबंदिया लगाया गया है,
कनाडा ने साफ शब्दों में अमेरिका की नीति का विरोध करते हुए कहाँ है कि अब अमेरिका और कनाडा के सम्बन्ध अब पहले जैसे नहीं रहे।
जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिआ नाटो समूह के देश यूरोपीय यूनियन जैसे गुट और देश जो हमेशा अमेरिका के साथ रहे है फ़िलहाल वे भी नाराज़ नज़र आये है।
फ़िलहाल यह तो नहीं पता कि अमेरिका फिर से ग्रेट अमेरिका बनेगा या नहीं पर अमेरिका के फैसलों से अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ी गिरावट के काले बादल मंडरा रहे है। स्पष्ट है कि अगर राष्ट्रपति ट्रम्प की जिद्द नहीं रुकी तो जरूर ही निकट भविष्य में दुनिया एक बड़ी मंदी देखने वाली है।
आपकी क्या राय है हमें नीचे कमेंट करके बताएं….
What a very exciting article now I am getting interest on the USA and Donald Trump policies what will be the next part of the particle I will be waiting for this article again for reading.
#IPupdates👍😁
wnpnR hMBxyL ytToa dgIln pHApZfD
kzoslrnotuileuxtmqephshymtfgws
zpmsrthnogtwsdqmttktopjdyqfywn
188bet’s always been a solid choice. Nhacai188bet just makes it easier to access. Good odds and a wide range of sports. Give it a shot if you’re feeling lucky! Link’s right here: nhacai188bet